राजेशवा(राजेश), अब गाँव मे ताश, क्रिकेट कुछो खेलते नही दिखता है।
तबरी साल तक तो था, सब लइकन के साथ खेलते रहता था, एकदमे लापता हो गिहिश!
पर जे कहिये उमेश भीया, “राजेशवा” आदमी ठीक था।
यही बाते बाते में टुनटुन(उमेश जी का लड़का) कोई से लड़-झगड़ के आ गया, कम उमर के है, बड़ी पीटा गया!
लेकिन, टुनटुनवा ओनहि से गाली देते आ रहा था।
ऐ हो उमेश भीया, ई टुनटुनवा एतना गाली देना सीख गया! आप तो बिल्कुल नही देते हैं, घरवो में कउनो नही देता है।
सबसे बड़ा बात तो ई है, कि होस्टल में रहता है, ई तो लोकडौन(lockdown) में एने तीन महीना से आएल है।
सवाल ये था, कि टुनटुन ने इतनी गालियाँ कैसे सिख ली?
मात्र छट्ठी कक्षा का छात्र है, और अब तो “राजेशवा” भी नही है गौंआ(गाँव) में।
हाँ! एक बात तो है आजकल ई ऑनलाइन पढ़ रहा है, लोकडौन के कारण… लेकिन खाली( केवल) दिने( दिन) वाला टाइम में।
लेकिन संझिया (शाम ) में उ का बोलते हैं, यूटुब(YouTube) देखता है, उहो खाली हँसे वाला(memes/standup comedies)……फलाने……..फलाने……
राजेशवा(राजेश): खेतिहर नौजवान है, कभी-कभी गाली देता था, वो भी क्रिकेट में आउट हो जाने पर, पूरे मैच में बॉलिंग नही मिलने पर, लेकिन वो किसी को गाली नही सिखाता था।
ऐसे कई राजेश गुमशुदा हो गए, जो बदनाम थे! गालियाँ सिखाने के लिए, दिन भर मटरगस्ती करने के लिए।
ऐसे कई अभिभावक(guardian), राजेश को दोषी मानते रहेंगे!
पर राजेश अब खेती करता है, और आस पास के बच्चों को अक्सर यही कहता है,” पढ़ ले बाबू, एहि उमरिया हाउ”।।