【पेड़ों का मरना】भाग 1

हर आम दिन की तरह आज भी सर्विन स्टेन्स, कॉलेज के लिए साईकल तेज़ी से चलाते हुए जा रहा था। उसे धूप और भूख दोनों ही तेज़ लगने लगी। आज कैंटीन में खाना नही मिला , शायद आज उसने देर कर दी!
पिछले दो सालों से सर्विन को ऐसा लग रहा था, धूप तेज़ होने लगी है, तभी उसकी दोस्त ने उसे लाइब्रेरी में बुला लिया, सर्विन किताबो में ज्यादा रुचि नही रखता था, पर उसकी मित्र उसे लाइब्रेरी में ही मिलने बुलाती थी, उसे(जेसिका अल्बर्ट) किताबे इकठ्ठी का बहुत शौक़ था।

उस दिन उसके बहुत कहने पर भी सर्विन लाइब्रेरी नही गया, क्योंकि रास्ते में उसने एक बच्चे को रोते हुए देखा और एक आदमी जो पेड़ो के बीच लोहे की आरी लिए किसी का इंतज़ार कर रहा था।
सर्विन दौड़ते हुए लाइब्रेरी में जाकर किताबों को गिनने लगा, ऐसा करते हुए देख सबलोग हंस रहे थे।
सर्विन अपनी उदासी को छुपाकर घर पहुँचा, अगले दिन न तो बच्चा दिखा और न ही वो पेड़, सर्विन समझ गया समय रुकता नहीं( time never waits)!
उसने लाइब्रेरी की किताबों और धूप को तेज होने की घटना को दो समानांतर रेखा का ग्राफ अपनी नोटबुक में बनाई,वो रेखाएं मिली तो नही! पर दोनों एक साथ आगे बढ़ रही थी।

उसे(सर्विन) किताबों से इतनी नफरत क्यों थी? वो कॉलेज की पढ़ाई पूरी नही कर पाया, उस दिन उसके हाथ मे बियर की बोतल थी, वो पहाड़ो के तरफ़ गया था, वो कभी वापस नही लौटा!
बहुत दिनों तक उसकी लाश और उसके बारे में कुछ भी पता नही चला, वो बिल्कुल पुलिस की गुमशुदगी वाले रिपोर्ट की तरह भुला दिया गया।

धूप!!आज बहुत तेज़ है, सर्विन को लापता हुए 2 दशक बीत गए,लाइब्रेरी में किताबें भरी पड़ी हैं, पर आज उसे गिनने वाला कोई “सर्विन” नही है।
वो उस नोटबुक में बनी उन समानांतर रेखाओं के मिलने का इंतेज़ार, पहाड़ो और पेड़ो के बीच में कहीं बैठे कर रहा है!

आवारा

राजेशवा(राजेश), अब गाँव मे ताश, क्रिकेट कुछो खेलते नही दिखता है।
तबरी साल तक तो था, सब लइकन के साथ खेलते रहता था, एकदमे लापता हो गिहिश!
पर जे कहिये उमेश भीया, “राजेशवा” आदमी ठीक था।
यही बाते बाते में टुनटुन(उमेश जी का लड़का) कोई से लड़-झगड़ के आ गया, कम उमर के है, बड़ी पीटा गया!
लेकिन, टुनटुनवा ओनहि से गाली देते आ रहा था।
ऐ हो उमेश भीया, ई टुनटुनवा एतना गाली देना सीख गया! आप तो बिल्कुल नही देते हैं, घरवो में कउनो नही देता है।
सबसे बड़ा बात तो ई है, कि होस्टल में रहता है, ई तो लोकडौन(lockdown) में एने तीन महीना से आएल है।
सवाल ये था, कि टुनटुन ने इतनी गालियाँ कैसे सिख ली?
मात्र छट्ठी कक्षा का छात्र है, और अब तो “राजेशवा” भी नही है गौंआ(गाँव) में।
हाँ! एक बात तो है आजकल ई ऑनलाइन पढ़ रहा है, लोकडौन के कारण… लेकिन खाली( केवल) दिने( दिन) वाला टाइम में।
लेकिन संझिया (शाम ) में उ का बोलते हैं, यूटुब(YouTube) देखता है, उहो खाली हँसे वाला(memes/standup comedies)……फलाने……..फलाने……

राजेशवा(राजेश):  खेतिहर नौजवान है, कभी-कभी गाली देता था, वो भी क्रिकेट में आउट हो जाने पर, पूरे मैच में बॉलिंग नही मिलने पर, लेकिन वो किसी को गाली नही सिखाता था।

ऐसे कई राजेश गुमशुदा हो गए, जो बदनाम थे! गालियाँ सिखाने के लिए, दिन भर मटरगस्ती करने के लिए।
ऐसे कई अभिभावक(guardian), राजेश को दोषी मानते रहेंगे!

पर राजेश अब खेती करता है, और आस पास के बच्चों को अक्सर यही कहता है,” पढ़ ले बाबू, एहि उमरिया हाउ”।।